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बसंत ऋतु आई है ..डा श्याम गुप्त....

Posted On: 25 Jan, 2015 Others में

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पर एक रचना …..वाणी की देवी .सरस्वती वन्दना से….
सरस्वती वन्दना
जो कुंद इंदु तुषार सम सित हार, वस्त्र से आवृता ।
वीणा है शोभित कर तथा जो श्वेत अम्बुज आसना
जो ब्रह्मा शंकर विष्णु देवों से सदा ही वन्दिता ।
माँ शारदे ! हरें श्याम’ के तन मन ह्रदय की मंदता ।

बसंत ऋतु आई है ….

( घनाक्षरी छंद )
१.
गायें कोयलिया तोता मैना बतकही करें ,
कोपलें लजाईं, कली कली शरमा रही |
झूमें नव पल्लव, चहक रहे खग वृन्द ,
आम्र बृक्ष बौर आये, ऋतु हरषा रही|
नव कलियों पै हैं, भ्रमर दल गूँज रहे,
घूंघट उघार कलियाँ भी मुस्कुरा रहीं |
झांकें अवगुंठन से, नयनों के बाण छोड़ ,
विहंस विहंस, वे मधुप को लुभा रहीं ||

२.
सर फूले सरसिज, विविध विविध रंग,
मधुर मुखर भृंग, बहु स्वर गारहे |
चक्रवाक वक जल कुक्कुट औ कलहंस ,
करें कलगान, प्रात गान हैं सुना रहे |
मोर औ मराल, लावा तीतर चकोर बोलें,
वंदी जन मनहुं, मदन गुण गा रहे |
मदमाते गज बाजि ऊँट, वन गाँव डोलें,
पदचर यूथ ले, मनोज चले आरहे ||

3.
पर्वत शिला पै गिरें, नदी निर्झर शोर करें ,
दुन्दुभी बजाती ज्यों, अनंग अनी आती है |
आये ऋतुराज, फेरी मोहिनी सी सारे जग,
जड़ जीव जंगम मन, प्रीति मदमाती है |
मन जगे आस, प्रीति तृषा मन भरमाये ,
नेह नीति रीति, कण कण सरसाती है |
ऐसी बरसाए प्रीति रीति, ये बसंत ऋतु ,
ऋषि मुनि तप नीति, डोल डोल जाती है |

४.
लहराए क्यारी क्यारी,सरसों गेहूं की न्यारी,
हरी पीली ओड़े साड़ी, भूमि इठलाई है |
पवन सुहानी, सुरभित सी सुखद सखि !
तन मन हुलसे, उमंग मन छाई है |
पुलकि पुलकि उठें, रोम रोम अंग अंग,
अणु अणु प्रीति रीति , मधु ऋतु लाई है |
अंचरा उड़े सखी री, यौवन तरंग उठे,
ऐसी मदमाती सी, बसंत ऋतु आई है ||

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
January 25, 2015

देखि के बसंत ऋतू, अँचरा उड़न हेतु, पवन समीर बन कैसे अकुलाते हैं, श्याम रसखान बन, गावत बसन धुन, जागरण मंच पर अधिक सुहाते हैं, आपकी प्रतिक्रिया चाहूँगा मान्यवर!

jlsingh के द्वारा
January 25, 2015

देखि के बसंत ऋतू, अँचरा उड़न हेतु, पवन समीर बन कैसे अकुलाते हैं, श्याम रसखान बन, गावत बसंत धुन, जागरण मंच पर अधिक सुहाते हैं, आपकी प्रतिक्रिया चाहूँगा मान्यवर!

drshyamgupta के द्वारा
January 27, 2015

धन्यवाद जे सिंह जी….क्या बात है … श्याम’ तो रहेंगे श्याम’ हैं रसखान, रसखान , भाँति रसखान लौं हाँ श्याम कों रिझावत हैं |

drshyamgupta के द्वारा
January 27, 2015

धन्यवाद


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